आध्यात्मिक दृष्टिकोण से रोज़ाना करने योग्य सर्वश्रेष्ठ प्राणायाम वे हैं जो प्राण ऊर्जा को नियंत्रित कर चेतना को परम तत्व से जोड़ते हैं। इनमें अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, भस्त्रिका, कपालभाती और उज्जायी प्रमुख हैं, जो अष्टांग योग के चतुर्थ अंग के रूप में मन को स्थिर कर ध्यान की ओर ले जाते हैं. ये प्राणायाम शरीर के पांच कोषों—अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय—में संतुलन लाते हैं।
आध्यात्मिक महत्व
प्राणायाम इंद्रियों को अंतर्मुख बनाता है, जिससे साधक आंतरिक चेतना की गहराई में उतरता है और परमात्मा से एकत्व का अनुभव करता है. यह नाड़ियों को शुद्ध कर चक्रों को जागृत करता है, जिससे आध्यात्मिक जागृति होती है और जीवन के उद्देश्य की समझ बढ़ती है. नियमित अभ्यास से समाधि की ओर अग्रसरता संभव हो जाती है।
🌿 नित्य करने योग्य सर्वश्रेष्ठ प्राणायाम (आध्यात्मिक दृष्टि से)
1. अनुलोम-विलोम प्राणायाम (सबसे श्रेष्ठ)

🕉️ आध्यात्मिक कारण
- इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों को शुद्ध करता है
- मन को स्थिर करता है और ध्यान के लिए तैयार करता है
- चित्त की अशुद्धियाँ दूर होती हैं
🧘♂️ कैसे करें
- दाहिनी नासिका से श्वास लें
- बाईं नासिका से श्वास छोड़ें
- फिर बाईं से लें, दाहिनी से छोड़ें
⏳ 10–15 मिनट प्रतिदिन
यह सबसे महत्वपूर्ण प्राणायामों में से एक है।
- मूल कार्य: यह शरीर की 72,000 नाड़ियों (ऊर्जा चैनलों) को शुद्ध करता है, विशेषकर इड़ा (चंद्र नाड़ी) और पिंगला (सूर्य नाड़ी) को संतुलित करता है।
- आध्यात्मिक लाभ:
- संतुलन: मन और भावनाओं में स्थिरता लाता है।
- एकाग्रता: ध्यान (Meditation) के लिए मन को तैयार करता है, जिससे सहजता से गहरा ध्यान लग पाता है।
- चेतना का जागरण: जब इड़ा और पिंगला संतुलित होती हैं, तो ऊर्जा मध्य मार्ग सुषुम्ना में प्रवेश करने लगती है, जो आध्यात्मिक जागरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
2. भ्रामरी प्राणायाम (आंतरिक शांति हेतु)

🕉️ आध्यात्मिक लाभ
- मन की चंचलता शांत होती है
- ध्यान गहरा होता है
- आज्ञा चक्र सक्रिय होता है
⏳ 5–7 बार पर्याप्त
यह मुखर (Vocal) प्राणायाम है जो आंतरिक शांति प्रदान करता है।
- मूल कार्य: यह नासिका और गले के माध्यम से एक मधुर ‘म’ ध्वनि का गुंजन उत्पन्न करता है, जिससे सिर और मस्तिष्क में कंपन होता है।
- आध्यात्मिक लाभ:
- आंतरिक शांति: यह मन की बेचैनी को कम करता है और तनाव को दूर करता है।
- आजन् चक्र (तीसरा नेत्र) पर प्रभाव: कंपन मस्तिष्क के केंद्र में स्थित पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) को सक्रिय करने में सहायक होता है, जिसे अक्सर आज्ञा चक्र से जोड़ा जाता है, जो अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिक दृष्टि का केंद्र है।
- ओंकार की अनुभूति: यह आंतरिक रूप से ब्रह्मांडीय ध्वनि ‘ओम’ या ‘ओंकार’ की अनुभूति कराने में सहायक होता है।
3. कपालभाति (शुद्धि के लिए)

🕉️ आध्यात्मिक लाभ
- शरीर व मन की जड़ता हटती है
- प्राण शक्ति जागृत होती है
- साधना में आलस्य दूर होता है
⏳ 1–2 राउंड (धीरे-धीरे)
यह तीव्र, बलपूर्वक श्वास बाहर छोड़ने की तकनीक है।
- मूल कार्य: यह फेफड़ों और मस्तिष्क को शुद्ध करता है, रक्त संचार बढ़ाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को तेजी से बाहर निकालता है।
- आध्यात्मिक लाभ:
- तमो गुण का नाश: यह शरीर और मन से आलस्य, सुस्ती और जड़ता (तमो गुण) को दूर करता है, जिससे ऊर्जा और उत्साह (सत्त्व गुण) बढ़ता है।
- मन की स्पष्टता: यह मस्तिष्क को तेज़ी से ऑक्सीजन प्रदान करके विचारों में स्पष्टता लाता है और ध्यान के लिए मन को ‘शून्य’ करने में मदद करता है।
- नोट: इसे खाली पेट और धीमी गति से अभ्यास करना चाहिए, खासकर यदि कोई उच्च रक्तचाप से पीड़ित हो।
4. उज्जायी प्राणायाम (विजयी श्वास)

- लाभ: मन को स्थिर और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
- आध्यात्मिक महत्व: श्वास की ध्वनि ध्यान का आधार बनती है, जिससे आत्म-साक्षात्कार की अनुभूति होती है
यह गले को संकुचित करके किया जाने वाला विशिष्ट श्वास है।
- मूल कार्य: यह शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है, जिससे अग्नि तत्त्व जाग्रत होता है और आंतरिक शुद्धि होती है। यह विश्राम तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic Nervous System) को शांत करता है।
- आध्यात्मिक लाभ:
- धारण और ध्यान: इस श्वास की धीमी, लयबद्ध ध्वनि ध्यान को गहरा करने में मदद करती है, क्योंकि यह एक आंतरिक श्रवण बिंदु (Focus Point) प्रदान करती है।
- कुंडलिनी शक्ति: योग परंपराओं में इसे मूलाधार से ऊर्जा को ऊपर की ओर खींचने में सहायक माना जाता है।
5. बस्त्रिका प्राणायाम (धौंकनी श्वास)

- लाभ: शरीर और मन में ऊर्जा का तीव्र प्रवाह।
- आध्यात्मिक महत्व: साधक को ध्यान और कुंडलिनी जागरण के लिए तैयार करता है
🌸 आध्यात्मिक साधकों के लिए सर्वश्रेष्ठ क्रम
- कपालभाति
- अनुलोम-विलोम
- भ्रामरी
- उसके बाद 5–10 मिनट ध्यान
🌺 महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सूत्र
“प्राण ही मन है, और मन ही बंधन व मोक्ष का कारण है।”
— योग शास्त्र
यदि आप केवल एक ही प्राणायाम रोज़ करना चाहते हैं, तो
👉 अनुलोम-विलोम सर्वोत्तम है।
🌸 आध्यात्मिक लाभ
प्राणायाम केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का साधन है:
- मन की शुद्धि: सांस पर नियंत्रण से विचारों की अशांति कम होती है।
- ध्यान की गहराई: प्राणायाम ध्यान के लिए मन को तैयार करता है।
- आत्म-जागरूकता: श्वास के माध्यम से साधक अपने भीतर की ऊर्जा और चेतना को अनुभव करता है।
- ईश्वर से जुड़ाव: उपनिषद और योगसूत्रों में प्राणायाम को आत्मा और परमात्मा के बीच सेतु कहा गया है
✨ आध्यात्मिक दृष्टिकोण का सार
आध्यात्मिक मार्ग पर प्राणायाम का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि चेतना के स्तर को ऊपर उठाना है।
- प्राणायाम आपकी प्राण शक्ति (जीवन ऊर्जा) को बढ़ाता है और उसे नियंत्रित करता है। यह ऊर्जा शरीर के भीतर चक्रों और नाड़ियों को सक्रिय करती है।
- जब प्राण नियंत्रित होता है, तो मन भी नियंत्रित होता है (योग सूत्र: चले वाते चले चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत – जब वायु चलती है, तो मन भी चंचल होता है; जब वायु स्थिर होती है, तो मन भी स्थिर हो जाता है)।
- प्राणायाम आपको भीतर की शांति, अपने मूल स्वरूप (आत्मा) और ब्रह्मांडीय चेतना के साथ जुड़ने का मार्ग प्रदान करता है।